भाटी ने कही दो टूक, चाहे जेल भेजों या सुरक्षा हटााओं पीछे नहीं हटूंगा
बाड़मेर के अंदर गिरल लिग्नाइट माइंस मजदूर आंदोलन को लेकर सियासी घमासान और तेज हो गया है। पिछले करीब डेढ़ महीने से जारी मजदूरों के आंदोलन के बीच शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने प्रदेश की भजनलाल सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी एक वीडियो के दौरान भाटी ने कहा कि मजदूरों की आवाज उठाने और उनके हक की लड़ाई लड़ने की वजह से उन्हें और उनके सहयोगियों को निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है। भाटी ने आगे कहा कि 19 मई को हुए घटनाक्रम के बाद उनके पीएसओ तखत सिंह को निलंबित कर दिया गया, जबकि वह पूरी तरह से निर्दोष हैं और उन्हें राजनीतिक दबाव के तहत कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।
विधायक भाटी ने सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी करने का आरोप लगाया और कहा कि प्रदेश में जनता की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को लगता है कि मुकदमे दर्ज कर, जेल भेजकर, सुरक्षा हटाकर या प्रशासनिक दबाव बनाते हुए किसी जनप्रतिनिधि को चुप कराया जा सकता है, तो यह उसकी गलतफहमी है। भाटी ने कहा कि जनता ने उन्हें निर्दलीय विधायक के रूप में चुना है और इसलिए चुना है ताकि वे गरीब, वंचित, शोषित, मजदूर, किसान, युवा और मातृशक्ति की समस्याओं को मजबूती से उठा सकें। ऐसे में जनता की आवाज उठाना उनका नैतिक कर्तव्य और राजधर्म दोनों मानते है...
भाटी ने दो टूक में कहा कि सरकार को मजदूरों की समस्याओं को समझना चाहिए और उनकी जायज मांगों पर गंभीरता से सोचना करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई सरकार के खिलाफ आवाज उठाता है तो उसके खिलाफ मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं, सुरक्षा हटाई जाती है और जेल भेजने की कोशिश होती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि का काम जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को उठाना का होता है, न कि बंद कमरों में बैठकर केवल औपचारिक रूप से बातचीत करने पर





